
कहानी संग्रह गरीबनवाज का लोकार्पण
कहानीकार अपने समय से आगे देखने की खास दृष्टि रखता है…संतोष चौबे
खंडवा। कहानीकार सिर्फ कल्पना का संसार नहीं रचता वह अपने समय से आगे देखने की खास दृष्टि भी रखता है। अपनी कहानी संग्रह गरीबनवाज पर चर्चा करते हुए मुख्य अतिथि संतोष चौबे ने यह कहा। कहानी संग्रह गरीबनवाज, अजय साकल्ले के कविता संग्रह एकांत में शोर और सृजन शिविर की रिपोर्ट के लोकार्पण के पश्चात अपनी कहानियों के अंश श्रोताओं के साथ साझा करते हुए संतोष चौबे ने कहानी के तत्वों पर भी गहन चर्चा की। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ अरुण रमेश जोशी ने कहा युवा पीढ़ी में लेखन के संस्कार रोपित करने के लिए लेखन सृजन कार्यशालाएं त्रैमासिक अंतराल पर आयोजित की जाती रहेंगी।स्वागत उदबोधन देते हुए कुलसचिव रवि चतुर्वेदी ने साहित्यकारों और पाठकों के बीच निरंतर संवाद जारी रखने के प्रयासों का विस्तार से उल्लेख किया। व्यंगकार कैलाश मंडलेकर ने कहानी संग्रह गरीबनवाज पर समीक्षा आलेख प्रस्तुत करते हुए कहा कि अलग विचारधाराओं, आधुनिक और परंपरागत मूल्यों के समावेश के साथ कहानी रच देना संतोष चौबे की खासियत है। वनमाली सृजन पीठ के अध्यक्ष गोविंद शर्मा ने कहा संतोष चौबे की कहानियों में डिटेलिंग किसी फिल्म के दृश्य की तरह होती है। सुनील जैन ने बताया कि इसके पूर्व वनमाली सृजन लेखन शिविर के विषय विशेषज्ञ जय नागड़ा,अरुण सातले,शैलेंद्र शरण ने शिविर,विद्यार्थी और विश्वविद्यालय के तालमेल की तारीफ की। कार्यक्रम का संचालन गोविंद शर्मा ने किया।संयोजन गीतिका चतुर्वेदी का था। इस अवसर पर नगर की विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं साहित्यकार मित्र उपस्थित थे।अंत में आभार सचिव श्याम सुंदर तिवारी द्वारा व्यक्त किया गया।









